शब्द से तात्पर्य –भाषा में शब्द का विशिष्ट स्थान होता है। शब्द भाषा की स्वतंत्र और अर्थवान इकाई है। शब्द और अर्थ में नित्य संबंध माना जाता है। वास्तव में अधिकतर शब्द सार्थक होते हैं और भाषा-विशेष के वर्णों के विशिष्ट क्रम से बनते है। वे वस्तु, विचार या भाव को अभिव्यक्त करते हैं।

वासुदेव नन्दन के अनुसार”ध्वनियों के मेल से बने सार्थक वर्ण समुदाय को शब्द कहते है |”
वर्णों का सार्थक समूह शब्द कह‌लाता है।
                      या
सार्थक ध्वनि-समूह शब्द कहलाता है
शब्द भाषा की सार्थक इकाई कहलाता है।
किसी भी भाषा में प्रयुक्त शब्दों के समूह को उस भाषा का शब्द भण्डार कहते हैं। भाषा का शब्द भंडार कितना ही बड़ा क्यों न हो फिर भी वह निरन्तर परिवर्तित और विकसित होता रहता है। संस्कृति ,सभ्यता ,तकनीक और खोज में परिवर्तन के साथ-साथ शब्द-भंडार पर भी प्रभाव पड़‌ता  रहता है। पुराने शब्द अप्रचलित हो जाते है और नए शब्द आ जाते हैं। इसी प्रकार शब्दों के पुराने अर्थ भी बदल जाते हैं और नए अर्थ देने लगते हैं।
शब्दों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है-

1- रचना के आधार पर – [ क] रूढ़ [ख] यौगिक [ ग ] योग रूढ़
2- स्रोत, इतिहास या व्युत्पत्ति के आधार पर- (क) तत्सम (ख) तद्‌भव (ग) देशज (घ) आगत (विदेशी) (ङ) संकर

3- प्रयोग के आधार पर –(क) सामान्य शब्द (ख) पारिभाषिक शब्द‌ या तकनीकी शब्द
4- व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर-( क) विकारी (ख) अविकारी
5-अर्थ के आधार पर – [ क] एकार्थी [ख] अनेकार्थी [ग]पर्यायवाची [ घ]विलोम 

1- रचना अथवा बनावट के अनुसार शब्दों का वर्गीकरण – शब्दों अथवा वर्णों के मेल से नये शब्द बनाने की प्रक्रिया को‘रचना या बनावट’ कहते हैं। कई वर्णों के मेल से शब्द बनता है और शब्द के खण्ड को शब्दांश कहते  हैं । जैसे- ‘राम’  में  शब्द  के  दो खण्ड  है- ‘रा’  और  ‘म’ ।  इन अलग-अलग शब्दांशों का कोई अर्थ नहीं है।  इसके  विपरीत, कुछ ऐसे भी शब्द है, जिनके दोनों खण्ड सार्थक होते हैं। जैसे- विद्यालय । इस शब्द के दो अंश है-‘विद्या’ और ‘आलय’। दोनों के अलग-अलग अर्थ है। इस प्रकार रचना के आधार पर शब्द के तीन भेद है- (क) रूढ़  (ख)यौगिक  (ग) योग रूढ़
(क-) रूढ़ – वे शब्द जो किसी शब्दांश के योग से बने हो अपने में पूर्ण हो और उनके सार्थक खंड नहीं हो सकते उन्हें रूढ़ या मूल शब्द कहते हैं ; जैसे – घर ,पानी ,फल ,कुर्सी आदि ।
(ख) यौगिक शब्द – दो शब्दों या शब्दांशों के योग से बने शब्द यौगिक शब्द कहलाते हैं। यह शब्द उपसर्ग , प्रत्यय ,संधि और उपसर्ग +प्रत्यय से बनते हैं; जैसे-सेनापति, अनुशासन, चतुराई ,विद्यालय आदि
(ग-) योगरूढ़ – जो यौगिक शब्द एक ही अर्थ में रूढ़ हो जाते हैं उन्हें योगरूढ़ शब्द कहते हैं; जैसे – चारपाई, जलज , लंबोदर, पीतांबर, पंकज ,चक्रपाणि आदि इस प्रकार इन शब्दों में योग भी हुआ है और निश्चित अर्थ (रूढ़) भी हो गया है।
2- स्रोत, इतिहास या व्युत्पत्ति के आधार पर –(क) तत्सम ( ख ) तद्भव (ग )देशज (घ) आगत (विदेशी) ( ङ) संकर
(क) तत्सम- जो शब्द संस्कृत से ज्यों के त्यों ले लिए गए , उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं ;जैसे – भूमि ,पुष्प , विद्वान, पृथ्वी, अहंकार ,ममता ,सुंदर , साहस ,शनै:-शनै:, रवि, स्वप्न, प्रथम, राष्ट्र।
( ख ) तद्भव – तद्भव का अर्थ है उससे उत्पन्न। संस्कृत के वे शब्द जो पालि, प्राकृत , अपभ्रंश ,पुरानी हिंदी से विकसित होते हुए हिंदी में अपने परिवर्तित रूप में प्रचलित हैं ,उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं ; जैसे- सप्त < सात, कर्म <काम, वर्ष <बरस, मातृ< माता, दुग्ध < दूध , कुंभकार <  कुंहार ,क्षीर< खीर ।
(ग) देशज शब्द  –जिन शब्दों के स्रोत अज्ञात है, उन्हें देशज शब्द कहते हैं। देशज शब्दों का मूल सामान्यतः जन-भाषाओं (बोलचाल) में होता है ; जैसे – पगड़ी, लोटा, ठेठ, झोला, खाट, झाड़ू, झंझट, थप्पड़, ठोकर, भोंपू, अटकल, भोंदू, चिड़िया, कटरा, अण्टा , कटोरा, डिबिया, कलाई, फुनगी , खिचड़ी,।
(घ) आगत (विदेशी) शब्द – ‘आगत’ शब्द का अर्थ है – आया हुआ। आगत शब्द वे शब्द हैं जो दूसरी भाषाओं से आए हैं और आज हिंदी के अपने बन गए हैं। हिंदी में अरबी, फारसी, अंग्रेजी, चीनी , रूसी, जापानी आदि भाषाओं के कई शब्द समा गए हैं ;जैसे –
[|] अरबी के शब्द – अखबार ,अदालत, अल्लाह, आईना, इंसाफ ,इंतजार ,इस्तीफा ,इम्तहान ,औरत ,कफ़न, कब्र , कसम ,कसाई ,कानून, कुरसी ,किताब ,खत, गदर, गबन, गुनाह , जनाज़ा , जलसा, जुर्माना ,जुलूस ,तरीका, ताकत, तूफ़ान ,दफ्तर, दलील, दवा ,  निकाह, फ़कीर ,दौलत , फ़सल ,मरीज, मस्जिद, मज़हब मुकदमा, मुहावरा, यतीम, रईस , रिश्वत, वकील ,शतरंज ,शैतान,ू सलाह , हिरासत, हुक्म ।
[||] फारसी –आदमी, आमदनी ,आसमान, कमरा, कारीगर, कारोबार, खुशामद ,गुब्बारा ,गुलाब ,चिराग ,चिलम, ज़ंजीर, ज़मीन , ज़हर ,जानवर , तराज़ू , दरवाज़ा , दिमाग़ ,दूरबीन, नमक, परदा, पुदीना , प्याज , फ़रियाद , फ़ौज, फ़ौलाद ,बदमाश ,बालूशाही ,बीमा, बेईमान, मज़दूर ,मसाला, मेज़ ,मेहमान , रसीद, शादी ,शायरी ,सब्जी ,सरकार ,सूरमा।
[|||]तुर्की के शब्द- उर्दू, कुरता, कुली ,कैंची ,चाकू ,तोप,बंदूक , बारूद , बेगम ,सौगात ।
[|V] पुर्तगाली के शब्द – आया, आलपिन , इस्पात ,गमला ,चाबी, तौलिया , नीलाम ,पादरी, फीता, बाल्टी ,मिस्त्री,संतरा, साबुन।
[V] अंग्रेजी के शब्द- अपील, इंजन, एकड़, कंपनी, कमीशन, कार, कॉलेज, कॉलोनी, कूपन ,कोर्ट, क्रिकेट ,क्लब , गाउन, गैस ,ग्राम, चॉकलेट ,चेक , जाकेट , जेल, टायर , डायरी ,डिग्री, डेरी ,नर्स , निब, पंप, पाइप , पाउडर ,फ्लैट, पुलिस , प्लेटफ़ॉर्म ,फुटबॉल, फ़ोटो ,फ्रॉक, बजट ,बूशर्ट , बूट , बैंक, बोगी, मेजर ,मोटर ,लॉटरी ,सूटकेस, स्कूटर ,स्टील, स्टेशन हीटर ।
[V|] रूसी शब्द – मिग,रूबल , स्पुतनिक,
[V||] फ्रांसीसी शब्द- काजू,कारतूस,अंग्रेज
[V|||] चीनी शब्द-चीनी, चाय
[|X] जापानी शब्द- रिक्शा
[X ] तुरूप शब्द- तुरूप
(ङ) संकर शब्द – दो भिन्न स्रोतों (भाषा) से आए  शब्दों के मेल से बने नए शब्द को संकर शब्द कहते हैं । रेल (अंग्रेजी)+गाड़ी (हिंदी)= रेलगाड़ी , पान (हिंदी) + दान (फारसी) =पानदान, छाया (संस्कृत )+ दार( फारसी )= छायादार , सील (अंग्रेजी) + बंद (फारसी)=सीलबंद ,  जांँच  (हिंदी ) + कर्ता (संस्कृत) जाँचकर्ता
3 -प्रयोग के आधार पर- प्रयोग की दृष्टि से शब्दों को दो वर्गों में बांँटा जा सकता है ।(क)सामान्य शब्द (ख) पारिभाषिक शब्द या तकनीकी शब्द
(क)सामान्य शब्द- सामान्य शब्दावली में वे शब्द आते हैं जिनका संबंध आम जनजीवन के साथ होता है। इन शब्दों का प्रयोग भाषा समुदाय के सदस्य अपने दैनिक व्यवहार में करते हैं; जैसे- हाथ, पैर, सुबह ,शाम ,घर, बाजार, दाल, भात आदि
(ख) पारिभाषिक शब्द -ऐसे शब्द जो ज्ञान-विज्ञान या विभिन्न व्यवसाय क्षेत्र में विशिष्ट  अर्थो में प्रयुक्त होते हैं उन्हें पारिभाषिक या तकनीकी शब्द कहते हैं; जैसे- संज्ञा, सर्वनाम आदि व्याकरण से संबंधित पारिभाषिक शब्द हैं तथा परावर्तन, घर्षण, घनत्व आदि भौतिक विज्ञान के संश्लेषण, सजातीय, सूक्ष्म तरंग , प्रति ध्वनि, प्रजनन, जीवमंडल, संचार, अर्थशास्त्र ,अधिनायक आदि
4- व्याकरणिक  प्रकार्य  के आधार पर- व्याकरणिक  दृष्टि से शब्दों को उनके प्रकार्य  के आधार पर दो भागों में बांटा जा सकता है।( क) विकारी (ख) अविकारी
(क) विकारी- विकारी शब्द वे होते हैं  जिनमें लिंग, वचन, कारक, काल , पक्ष के कारण परिवर्तन होता है। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, और क्रिया विकारी शब्द है; जैसे – लड़का – लड़की , मै – मेरा, अच्छा – अच्छी, जाना- गया ।
(ख) अविकारी- ऐसे शब्द जिनके मूल रूप में परिवर्तन या विकार नहीं होता उन्हें अविकारी शब्द (अव्यय) कहते हैं; जैसे – क्रिया विशेषण, संबंध-बोधक, समुच्चय-बोधक, विस्मयादिबोधक और निपात अविकारी शब्दों की श्रेणी में आते हैं; जैसे – आज, यहां, और, अथवा, अरे , ही, तक ।
5 – अर्थ के आधार पर – (क) पर्यायवाची या समानार्थी शब्द, प्रति शब्द
(ख)  विलोमार्थी शब्द
(ग)  एकार्थी शब्द
(घ) अनेकार्थी शब्द
(ङ) श्रुति समभिन्नार्थक शब्द
(क) पर्यायवाची शब्द – जिन शब्दों के अर्थ में समानता हो उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं। किंतु अर्थ में सामान्य होते हुए भी पर्यायवाची शब्द प्रयोग में सर्वथा एक दूसरे का स्थान नहीं ले सकते, कहीं एक शब्द उपयुक्त होता है तो कहीं अन्य। प्रत्येक शब्द का प्रयोग विषय और संदर्भ के अनुसार ही करना उचित होता है। उदाहरण के लिए पितरों का तर्पण ‘ जल से किया जाना उचित है ‘पानी ‘ से नहीं। भाव है कि शब्द कहीं पूर्ण पर्यायवाची होते हैं; की आंशिक।

(ख) विलोमार्थी शब्द – किसी शब्द से विपरीत अर्थ देने वाला शब्द उसका विलोम या विपरीतार्थी कहा जाता है; जैसे- मान-अपमान, कुटिल  – सरल, धृष्ट – विनीत, आगत – विगत/ निर्गत ,अथ – इति।
(ग) एकार्थी शब्द – जिन शब्दों का अर्थ सभी परिस्थितियों में एक सा रहता है उन्हें एकार्थी शब्द कहते हैं; जैसे – अहंकार , उत्तम , शस्त्र, अपराध , पाप, निंदा , अपयश , कलंक ,अनुराग ,आसक्ति ,अर्चन , स्वागत , आराधना , ऋषि , तंद्रा।
(घ) अनेकार्थी शब्द – प्रयोग के अनुसार विभिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न अर्थ देने वाले शब्द अनेकार्थी कहलाते हैं; जैसे – अंम्बर  – वस्त्र, आकाश, कपास अनंत – असीम, आकाश, अविनाशी, विष्णु, शेषनाग अपेक्षा – आवश्यकता, तुलना में अरुण – लाल, प्रातःकालीन सूर्य, सूर्य का सारथी अलि – भौंरा , कोयल, सखी अवकाश- बीच का समय, अवसर, छुट्टी

(ङ)  श्रुति समभिन्नार्थक – कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो ध्वनि एवं वर्तनी की दृष्टि से बहुत कुछ समान लगते है, किन्तु अर्थ की दृष्टि से ये एक-दूसरे से सर्वथा भिन्न होते हैं, ऐसे शब्दों को श्रुति समभिन्नार्थक शब्द कहते हैं; जैसे – अगर (यदि) अगार (भंडार) , अगला (आगे का) अर्गला (रोकने की कील), अजर (जिसे बुढ़ापा नही आता) अजिर (आँगन), अंस (कन्धा) अंश (हिस्सा), अन्न (अनाज) अन्य (दूसरा ) , अथक(बिना थके) अकथ(जो कहा ना जा सके), अरि (शत्रु) अरी (संबोधन स्त्री के लिए)
अलि (भौंरा) अली (सखी) अवधि (काल, समय) अवधी (अवध देश की भाषा)।

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Dr. Rajesh Sir

असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग तिलक महाविद्यालय, औरैया।

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