संज्ञा- किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव इत्यादि को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा को नाम भी कहते है। किसी का नाम ही उसका संज्ञा है तथा इस नाम से उसे पहचाना जाता है। संज्ञा न हो तो उसकी पहचान अधूरी है और भाषा का प्रयोग भी विना संज्ञा के संभव नहीं है।
संज्ञा के भेद – हिन्दी व्याकरण में सभी तरह की संज्ञाओं को दो भागों में बाँटा गया है।-
1- वस्तु की दृष्टि से। – चार भेद
2- धर्म की दृष्टि से – एक भेद
1- वस्तु की दृष्टि से संज्ञा के भेद-
(क)-व्यक्ति वाचक
(ख)- जातिवाचक
(ग)- समूहवाचक
(घ)-द्रव्यवाचक
2- धर्म की दृष्टि से भेद -धर्म की दृष्टि से संज्ञा का भेद एक है जिसका नाम है भाव वाचक संज्ञा।
कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- समूहवाचक का समावेश व्यक्ति वाचक तथा जातिवाचक में ,और द्रव्यवाचक का समावेश जाति वाचक में हो जाता है। इस प्रकार संज्ञा तीन प्रकार की होती है।-
1- व्यक्ति वाचक
2- जाति वाचक
3- भाव वाचक
1- व्यक्ति वाचक संज्ञा – जिस शब्द से किसी एक वस्तु या व्यक्ति का बोध हो उसे व्यक्ति वाचक संज्ञा कहते हैं। व्यक्ति वाचक संज्ञाएँ निम्न लिखित रूपों में भी होती है?
1- व्यक्तियों के नाम- राम,श्याम, सुरेश
2- दिशाओं के नाम- उत्तर , दक्षिण , पश्चिम , पूर्व
3- देशों के नाम- भारत, अमेरिका, कनाडा,जापान
4- राष्ट्रीय जातियों के नाम – भारतीय, अमेरिकी, चीनी
5- समुद्रों के नाम – हिन्द महासागर , प्रशान्त महासागर,
6- नदियों के नाम – गंगा, यमुना, सिन्धु, चम्बल,
7- पर्वतों के नाम- हिमालय, अरावली
8- नगरों, सड़कों , चौके के नाम- कानपुर, लखनऊ,
9- पुस्तकों तथा समाचार पत्रों के नाम- रामचरितमानस, पद्मावत,गोदान, दैनिक जागरण,अमर उजाला
10- ऐतिहासिक युद्धों तथा घटनाओं के नाम- तराइन , पानीपत, हल्दीघाटी,
11- दिनों महीनों के नाम- रविवार, शनिवार सोमवार। जनवरी फरवरी
12- त्योहारों, उत्सवों के नाम- होली, दिपावली,
2- जाति वाचक संज्ञा – जो संज्ञा किसी जाति (समूह) का बोध कराती है, वे जाति वाचक संज्ञा कहलाती हैं। जैसे मनुष्य ,धर्म, पहाड़, नदी , घर आदि ‘मनुष्य’ कहने से संसार के सभी मनुष्य जाति का , ‘घर ‘ कहने से सभी तरह के घरों का और ‘नदी’ कहने से सभी प्रकार की नदियों का जातिगत बोध होता है। जातिवाचक संज्ञा निम्नलिखित स्थितियों की होती है-
क – सम्बंधियों के नाम – माता-पिता, भाई-बहन, चाची-चाचा
ख – व्यवसायों के नाम – नाई, लोहार, बढ़ई, जुलाहा
ग -पदों के नाम – मंत्री, अध्यापक, प्रोफेसर
घ -कार्यों के नाम – दलाली, ठगी
ड.-पशु-पक्षियों के नाम- कौवा, तोता, मैना, बकरी, भैस
च – वस्तुओं के नाम- गिलास, थाली, मेज, कुर्सी,
छ – प्राकृतिक तत्त्वों के नाम – भूकम्प, तूफान, बिजली, वर्षा, ज्वाल-मुखी
नोट- जाति वाचक संज्ञा के दो भेद है-
(|) समूहवाचक
(||) द्रव्यवाचक
②- जिस शब्द से नर या मादा जाति का बोध न हो उसे नित्य शब्द कहते है। जैसे- गिलहरी मछली, चमगादड़, कोयल
नित्य शब्द में लिंग बताने के लिए शब्द के आगे नर और मादा लगाना पड़ता है ; जैसे – नर गिलहरी-मादा गिलहरी इसमें ‘गिलहरी ‘नित्य शब्द है।
(|) समूह वाचक – जो संज्ञा शब्द किसी एक व्यक्ति का वाचक न होकर समूह अथवा समुदाय के वाचक है ; वे समूहवाचक संज्ञा कहलाते है ; जैसे-
(क)- व्यक्तियों का समूह – समा, दल, गिरोह
(ख)-वस्तुओं का समूह – गुच्छा , कुंज, मण्डल, शौर
(ग)- अन्य समूह बोधक शब्द- सभा, समिति, टीम, पुलिस, सेना, आयोग, वर्ग, भीड़, परिवार
(||) द्रव्य वाचक – जिस संज्ञा शब्द से नाप-तौल वाली वस्तु का बोध हो उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है; जैसे-लोहा, चांदी, सोना, दूध, चटनी, अचार आदि
नोट- इस (द्रव्य वाचक)संज्ञा शब्द का सामान्यतः बहुवचन नहीं होता।
3- भाव वाचक – जिस संज्ञा शब्द से व्यक्ति या वस्तु के गुण या धर्म, दशा अथवा भाव का बोध होता है। उसे भाव वाचक संज्ञा कहते हैं ; जैसे – प्यार, घृणा, ईमानदारी, मिठास, नम्रता, लम्बाई, चाल , समझ, बुढ़ापा , यौवन, कालिमा, लालिमा आदि
हर पदार्थ में धर्म होता है। जैसे- पानी में – शीतलता, आग में – गर्मी मनुष्य में – देवत्व और पशुत्व इत्यादि का होना आवश्यक है। पदार्थ धर्म, पदार्थ से अलग नहीं रह रह सकता ; जैसे- घोड़ा है तो इसमें बल है, वेग है और आकार भी है।
→ भाव वाचक संज्ञा का अनुभव हमारी इन्द्रियों से होता है। और प्रायः इसका बहुवचन नहीं होता।
~अनुभव से महसूस किया जा सके तो – भाव वाचक संज्ञा
भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण-
जाति वाचक से भाव वाचक –
| जातिवाचक | भाव वाचक |
| बूढ़ा | बुढ़ापा |
| लड़का | लड़कपन |
| मित्र | मित्रता |
| दास | दासत्व |
| पंडित | पंडिताई |
| ठाकुर | ठकुराई |
सर्वनाम से भाव वाचक –
| सर्वनाम | भाव वाचक |
| अपना | अपनापन |
| निज | निजत्व/निजता |
| मम | ममत्व/ममता |
विशेषण से भाववाचक-
| विशेषण से | भाव वाचक |
| मीठा | मिठास |
| कठोर | कठोरता |
| गर्म | गर्मी/ गर्माहट |
| सर्द | सर्दी |
| ठण्ड | ठंडी |
| चतुर | चातुर्य |
अव्यय से भाववाचक
| अव्यय | भाववाचक |
| शाबाश | शाबाशी |
| वाह -वाह | वाह -वाही |
| समीप | समीपता |
| सामिप्य | निकट |
| निकट | निकटता/नैकट्य |
| परस्पर | पारस्पर्य / पारस्परिक |
गांधी अपने समय के कृष्ण थे।
नोट – कभी-कभी व्यक्ति वाचक संज्ञा का प्रयोग जातिवाचक संज्ञा में होता है। ऐसा किसी व्यक्ति का असाधारण गुण , धर्म दिखाने के लिए किया जाता है। ऐसी अवस्था में – गुण धर्म दिखाने वाली व्यक्ति वाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा में बदल जाती है। यही कारण है कि उपर्युक्त वाक्य में ‘कृष्ण’ शब्द जाति वाचक संज्ञा है।
प्रिया हमारे घर की लक्ष्मी है।
तुम कलयुग के भीम हो ।
नोट-2 कभी-कभी जातिवाचक संज्ञाओं का प्रयोग व्यक्ति वाचक संज्ञाओं में होता है; जैसे-
देवी से – दुर्गा जी का
गोस्वामी से – तुलसी दास
पुरी- जगन्नाथपुरी