कारक

           कारक –  संज्ञा  या  सर्वनाम  का वाक्य के अन्य पदों विशेषतः क्रिया से जो सम्बन्ध होता है, उसे कारक कहते हैं। संस्कृत की कारक व्यवस्था जहां विभक्तियों पर आधारित थी, वहीं हिंदी की कारक व्यवस्था परसर्गों पर आधारित है।  यही कारण है कि जहां संस्कृत के कारक पूर्णतया लिंग वचन सापेक्ष थे, वहीं हिंदी के कारक प्रायः लिंग वचन निरपेक्ष हैं।

 कारक के भेद –  (संस्कृत 6 कारक 7 विभक्तियाँ है।)

     हिन्दी में आठ कारक हैं और कारकों के बोध के लिए संज्ञा या सर्वनाम के आगे जो प्रत्यय चिह्न  लगाये जाते है, उन्हें व्याकरण में विभक्तियांँ कहते हैं। कुछ लोग उसे ‘परसर्ग’ भी कहते हैं।

हिन्दी कारकों को विभक्तियों के चिह्न इस प्रकार हैं।-

कारक विभक्तियांँ /परसर्ग
कर्ताने
कर्मको
करणसे, द्वारा
सम्प्रदानको, के, लिए
अपादानसे -(अलगाव का बोध , लज्जा ,तुलना , भय , गिरने/उतरने )
सम्बन्धका, के, की, रा, रे, री
अधिकरणमें, मैं, पर
संबोधनहे!अरे!

1- कर्ता कारक – कर्ता अर्थात करने वाला। वाक्य में जो शब्द काम करने वाले के अर्थ में आता है उसे कर्ता कहते है। इसकी विभक्ति ‘ ने ‘ है। कर्ता कारक का वाक्य कहीं-कहीं विभक्ति शून्य हो जाता है। इस सम्बन्ध में नियम यह है कि भूतकालीन क्रियाओं में कर्ता के साथ प्रायः ‘ने ‘ का प्रयोग किया जाता है जबकि वर्तमान या भविष्य काल की क्रियाओं में नहीं किया जाता ; जैसे –

 भूतकालभविष्य कालवर्तमान काल
उत्तम पुरुषमैंने खाना खायामैं खाना खाऊंगामैं खाना खा रहा हूं
मध्यम पुरुषतुमने खाना खायातुम खाना खाओगेतुम खाना खा रहे हो
प्रथम पुरुषउसने खाना खायावह खाना खाएगा वह खाना खा रहा है

राम ने रोटी खायी।

नोट 1 – जहाँ क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के अनुसार न होकर कर्म के अनुसार होते है वहाँ ‘ ने ‘ विभक्ति लगती है। इसे व्याकरण में ‘स ‘ प्रत्यय कर्ता कारक कहते हैं।

  • राम स्कूल जाता है
  • श्याम ने मिठाई खाई।

नोट-2   जहाँ क्रिया के लिंग , वचन और पुरुष कर्ता के अनुसार होते हैं, वहाँ ‘ने’ का प्रयोग नही होता है; जैसे- राम खाता है। ,श्याम घर जाता है।

2- सम्प्रदान कारक – जिसके लिए कुछ किया जाये या जिसको कुछ दिया जाए इसका बोध कराने वाले शब्द के रूप को सम्प्रदान कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति को, के है ; जैसे-

  • माँ ने बच्चे को खिलौने दिये।
  • रमेश मोहन को रुपये देता है।
  • गुरु ही शिष्य को ज्ञान देता है।.

नोट –कभी-कभी के हित, के वास्ते, के निमित्त प्रत्यय लगाकर भी सम्प्रदान कारक कहलाता है ; जैसे-

  • राम के हित लक्ष्मण बन गये।
  • अहल्या के वास्ते ही जैसे राम ने अवतार लिया।
  • मेरे निमित्त ही यह अवसर आया है।

3- कर्म कारक- जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़े उसे कर्म कारक कहते है। इसकी विभक्ति ‘को ‘ है; जैसे- माँ ने बच्चे को सुलाया।

नोट 1- बुलाना, पुकारना, सुलाना, कोसना, जगाना, भगाना इत्यादि  क्रियाओं के कर्मों के साथ ‘को’  विभक्ति लगती है; जैसे –  * मैंने हरि को बुलाया।

  • पिता ने पुत्र को पुकारा।
  • मीरा ने सावित्री को जी भर कोसा ।

नोट 2- ‘मारना’ क्रिया का अर्थ जब पीटना होता है तब ‘को’ का प्रयोग किया जाता है। किन्तु मारना क्रिया का अर्थ शिकार करना होता है तब ‘को’ का प्रयोग नहीं किया जाता ; जैसे- लोगों ने चोर को मारा।

  • हरि ने कुत्ते को मारा।
  • शिकारी ने शेर मारा
  • शिकारी ने  शेर को मारा -अशुद्ध
  • मछुवारों ने मछली  को मारी- अशुद्ध
  • मछुवारों ने मछली मारी- शुद्ध वाक्य
  • मारना = पीटना को√ शिकार करना को x

नोट 3-  वाक्य में प्रयुक्त निर्जीव कर्म के साथ  ‘ को’ का प्रयोग नही होता; जैसे-

  • कुर्सी को यहांँ रखो। अशुद्ध वाक्य
  • कुर्सी यहांँ रखो। शुद्ध वाक्य
  • मैं समाचार पत्र को पढ़ता हूँ। अशुद्ध वाक्य
  • मैं समाचार पत्र पढ़ता हूँ । शुद्ध वाक्य
  • निर्जीव = को का प्रयोग नही
  • सजीव = को

4- अपादान कारक – जिस संज्ञा से अलग होने का भाव प्रकट हो उसे अपादान कारक कहते हैं। इसकी  विभक्ति ‘से’ है ; जैसे – वृक्ष से पत्ते गिरते है। अलगाव का बोध

नोट – जिन शब्दों से तुलना करने ,भय लगने, लजाने, गिरने अथवा उतरने का बोध  हो वहांँ अपादान कारक होता है; जैसे –

  • मोहन सोहन से लम्बा है- तुलना का भाव
  • रीना छिपकली से डरती है- भय का भाव
  • रीना सोहन से लजाती है। लज्जा का भाव
  • बच्चा चारपाई से गिर पड़ा। गिरने का बोध
  • गुड़िया छत से उतर रही है।  उतरने का बोध

5- करण कारक-  कर्ता जिस साधन से क्रिया करता है। उसे करण कारक कहते है। इसकी विभक्ति से, के द्वारा है ; जैसे- मोहनलाल ने पेन से लेख लिखा।

मोहन द्वारा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

→ वह कुल्हाड़ी से वृक्ष काटता है। (करण कारक)

 चूहा बिल से बाहर निकला। (अपादान कारक)

⇒ मुझे अपनी मेहनत से भोजन मिलता है। (करण कारक)

→ साधुओं की संगत से बुद्धि सुधरती है। (करण कारक)

       मोहन ने घड़े से पानी डाला। (अपादान)

6- सम्बन्ध कारक-  संज्ञा या सर्वनाम के किस रूप से एक वस्तु का दूसरी से परस्पर संबंध पता चले उसे संबंध कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति का, की, के, रा, री ,रे है ; जैसे-

  • मोहन की माता जी आयीं है।
  • राम का भाई आया है।

नोट 1 – कभी-कभी संबंध कारक की विभक्ति के स्थान में ‘वाला’ प्रत्यय भी लगता है ; जैसे-

  • विनोद वाली किताब ।
  • रमेश वाला घर।
  • चाँदी वाली थाली।

2. नोट – संबंध, आधिकार और देने के अर्थ में प्रायः संबंध कारक की विभक्ति का प्रयोग होता है ; जैसे-

  • उसके चाचा के पुत्री हुई है। शुद्ध वाक्य
  • रावण ने विभीषण के लात मारी।  शुद्ध वाक्य
  • राम के बहन हुई। शुद्ध वाक्य
  • राजा के आँखें नहीं होती, केवल कान होते है। शुद्ध वाक्य

7-अधिकरण कारक – संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के होने या आधार का स्थान पता चले, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति में, पर है ; जैसे-

  • तोता पेड़ पर बैठा है।
  • पंछी आकाश में उड़ रहा है।

नोट- कभी-कभी अधिकरण कारक की विभक्तियों का लोप भी हो जाता है ; जैसे –

  • इन दिनो वह पटने है (शुद्ध वाक्य)
  • वह संध्या समय गंगा किनारे जाता है। (शुद्ध वाक्य )
  • लड़के दरवाजे – दरवाजे घूम रहे हैं। शुद्ध वाक्य
  • वह द्वार-द्वार भीख मांगता चलता है। शुद्ध वाक्य

नोट – पटने, कलकत्ते, आगरे, ढाके, इन चारों में ए का प्रयोग होता है।

8 -संबोधन कारक – जिस शब्द से किसी को पुकारने या संबोधन देने का भाव प्रकट हो उसे संबोधन कारक कहते है। इस कारक के साथ सदैव संबोधन चिह्न  (!) प्रयोग किया जाता है; जैसे-

  • अरे ! तुम कब आये।
  • अरे मोहन ! तुम कब आय।
  • हे भगवान ! मेरी रक्षा कीजिए।

पी.सी.एस. 2015–

1- आप वाली किताब छत में पड़ी है। अशुद्ध वाक्य

    आप वाली किताब छत पर पड़ी है। शुद्ध वाक्य

2- समाज के भिखारियों से कृपा करनी चाहिए। अशुद्ध वाक्य

     समाज के भिखारियों पर कृपा करनी चाहिए। शुद्ध वाक्य

 3-‘ यामा ‘ महादे‌वी के काव्य का संकलन है। अशुद्ध वाक्य

 ‘यामा’ महादेवी का काव्य संकलन है।-शुद्ध वाक्य

हिन्दी कारक व्यवस्था  के महत्त्वपूर्ण तथ्य –

1-वाक्य रचना में प्रायः आठों कारकों का क्रम निश्चित है जो इस प्रकार है –

संबोधन(यदि हो)> कर्ता> अधिकरण> सम्बन्ध> अपादान> सम्प्रदान> करण> कर्म

इस क्रम को निम्न उदाहरण में देखा जा सकता है –

अरे मोहन (संबोधन)! तुमने ( कर्ता) विद्यालय में (अधिकरण)खेल अध्यापक की (संबंध)अलमारी से ( अपादान) बच्चों के लिए (संप्रदान)हाथ से (करण) खेलने वाले खिलौने (कर्म) क्यों चुराए (क्रिया)?

2-यदि परसर्ग संज्ञा के साथ प्रयुक्त होता है तो अलग से लिखा जाता है ; जैसे – राम ने फूल तोड़ा।

3-यदि परसर्ग सर्वनाम पद के साथ आता है तो संयुक्त करके लिखा जाता है ; जैसे- उसने फूल तोड़ा

4- यदि सर्वनाम के साथ एक से अधिक परसर्ग आ जाएंँ तो परसर्गों को अलग-अलग लिखा जाता है पहला परसर्ग सर्वनाम से जोड़कर लिखा जाता है जबकि शेष परसर्ग अलग करके लिखे जाते हैं ; जैसे -उसके लिए कोई प्रयास मत करो।

Facebook
WhatsApp
X
Print

Dr. Rajesh Sir

असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग तिलक महाविद्यालय, औरैया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *