हिंदी व्याकरण

वाक्य रचना

वाक्य रचना

  वाक्य – सार्थक शब्दों का व्यवस्थित समूह जिससे अपेक्षित अर्थ प्रकट हो वाक्य कहलाता है. भाषा की मुख्य इकाई वाक्य है, जिससे किसी भाव को पूर्णरूप से व्यक्त किया जा सकता। इस कथन में ‘दो बातें’ दिखाई देती हैं-1- वाक्य शब्दों की वह इकाई है जो रचना की दृष्टि

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कारक

कारक

           कारक –  संज्ञा  या  सर्वनाम  का वाक्य के अन्य पदों विशेषतः क्रिया से जो सम्बन्ध होता है, उसे कारक कहते हैं। संस्कृत की कारक व्यवस्था जहां विभक्तियों पर आधारित थी, वहीं हिंदी की कारक व्यवस्था परसर्गों पर आधारित है।  यही कारण है कि जहां संस्कृत के कारक पूर्णतया लिंग वचन

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वचन

वचन

वचन – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध हो, उसे वचन  कहते हैं। वचन का शाब्दिक अर्थ है- ‘संख्या वचन’। संख्या वचन का ही संक्षेप में वचन कहते है। वचन का एक और अर्थ है- ‘कहना‘ वचन के प्रकार – हिन्दी में केवल दो

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लिंग

लिंग

लिंग – शब्द की जाति को लिंग कहते हैं । संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की ‘नर’ या ‘मादा‘ जाति का बोध हो उसे व्याकरण में ‘लिंग’ कहते हैं। लिंग का शाब्दिक अर्थ है चिह्न या निशान। हम जानते हैं कि चिह्न या निशान किसी संज्ञा का

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अव्यय

अव्यय

    अव्यय – ऐसे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक, पुरुष, इत्यादि के कारण कोई विकार नहीं आता अव्यय कहलाते है।अव्यय अर्थात ( अ + व्यय ) ऐसा शब्द जो व्यय नहीं होता। ये शब्द सदैव अपरिवर्तित रहते हैं। इनका मूलरूप स्थिर रहता हैं।  कभी बदलता नहीं ; जैसे- जब, तब, अभी,

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विशेषण

विशेषण

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, परिणाम आदि) बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते है। जो शब्द विशेषता बतलाते है वे विशेषण कहलाते है। जैसे – बड़ा ,छोटा, काली, दयालु, लम्बा आदि, जबकि जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है। उसे विशेष्य कहा जाता है ; जैसे-     लाल

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सर्वनाम इमेज

सर्वनाम

सर्वनाम अर्थात सबके नाम । जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त हो उन्हें सर्वनाम कहते है। ये शब्द किसी व्यक्ति विशेष द्वारा प्रयुक्त न होकर सबके द्वारा प्रयुक्त होते है तथा किसी एक का नाम न होकर सबके नाम होते हैं। सर्वनाम के भेद= सर्वनाम के छह(6)  भेद है

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संज्ञा

संज्ञा: परिभाषा और भेद

संज्ञा- किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव इत्यादि को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा को नाम भी कहते है। किसी का नाम ही उसका संज्ञा है तथा इस नाम से उसे पहचाना जाता है। संज्ञा न हो तो उसकी पहचान अधूरी है और भाषा का प्रयोग भी विना संज्ञा के संभव नहीं

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हिंदी वर्णमाला: उच्चारण स्थान और प्रयत्न के आधार पर विभाजन

वर्णमाला      ध्वनि शब्दों की आधारशिला है, जिसके बिना शब्द की कल्पना नहीं की जा सकती । वर्ण के उच्चरित रूप को ध्वनि एवं लिखित रूप को वर्ण कहा जाता है।वर्ण हमारी उच्चरित भाषा या वाणी की सबसे छोटी इकाई है।हिंदी वर्णमाला में वर्णों की तो कुल संख्या वर्तमान में 53

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शब्द

शब्द से तात्पर्य –भाषा में शब्द का विशिष्ट स्थान होता है। शब्द भाषा की स्वतंत्र और अर्थवान इकाई है। शब्द और अर्थ में नित्य संबंध माना जाता है। वास्तव में अधिकतर शब्द सार्थक होते हैं और भाषा-विशेष के वर्णों के विशिष्ट क्रम से बनते है। वे वस्तु, विचार या भाव

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