1. स्थापना और उद्देश्य
इस पुरस्कार की शुरुआत सन् 1965 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और सोवियत संघ (अब रूस) के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना था। यह पुरस्कार उन लेखकों और कलाकारों को दिया जाता था जिनकी कृतियों ने शांति, मानवतावाद और भारत-सोवियत मित्रता को बढ़ावा दिया।
2. कौन प्रदान करता था?
यह पुरस्कार सोवियत संघ की सरकार द्वारा संचालित समाचार एजेंसी ‘TASS’ के तहत प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘सोवियत लैंड’ के माध्यम से दिया जाता था।
3. प्रमुख तथ्य
- प्रथम विजेता: हिंदी के प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत को उनके महाकाव्य ‘लोकायतन’ के लिए 1965 में सबसे पहला सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला था।
- विविधता: यह केवल साहित्य ही नहीं, बल्कि चित्रकला और अन्य कलात्मक क्षेत्रों में भी दिया जाता था।
- महत्व: 1960 से 1980 के दशक के बीच इस पुरस्कार का बहुत अधिक सम्मान था क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाता था।
| रचनाकार | रचना |
| सुमित्रानंदन पंत | लोकायतन |
| शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ | मिट्टी की बारात |
| केदारनाथ अग्रवाल | फूल नहीं रंग बोलते हैं |
| रामविलास शर्मा | भारत में अंग्रेजी राज्य और मार्क्सवाद |
| अमृतलाल नागर | अमृत और विष |
| अब्दुल विस्मिल्लाह | झीनी झीनी बीनी चदरिया |