वाक्य – सार्थक शब्दों का व्यवस्थित समूह जिससे अपेक्षित अर्थ प्रकट हो वाक्य कहलाता है. भाषा की मुख्य इकाई वाक्य है, जिससे किसी भाव को पूर्णरूप से व्यक्त किया जा सकता। इस कथन में ‘दो बातें’ दिखाई देती हैं-
1- वाक्य शब्दों की वह इकाई है जो रचना की दृष्टि से अपने-आप ने स्वतंत्र है।
2- वाक्य किसी विचार भाव या मंतव्य को पूर्णतया प्रकट करता है।
इस प्रकार वाक्य पदों का वह व्यवस्थित समूह है, जिसमें पूर्ण अर्थ देने की शक्ति होती है।
वाक्य के अंग – वाक्य के दो अंग (खण्ड) होते हैं-
1-उद्देश्य
2-विधेय
1- उद्देश्य – उद्देश्य वाक्य का वह अंग होता है, जिसके बारे में कुछ कहा जाता है। उसे सूचित करने वाले शब्द को उद्देश्य कहते हैं ; जैसे- 1- अर्जुन ने जयद्रथ को मारा। 2- कुत्ता भौंक रहा है। 3- तोता डाल पर बैठा है। 4- मैने उसे पीटा। उपर्युक्त चारों वाक्यों में क्रमशः- ‘अर्जुन ने ‘ कुत्ता, तोता, मैने, उद्देश्य है .
2-विधेय – उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है, अथवा उद्द्देश्य (कर्ता) जो कुछ कार्य करता है वह सब विधेय कहलाता है; जैसे -1- अर्जुन ने जयद्रथ को मारा। 2- कुत्ता भौंक रहा है। 3- तोता डाल पर बैठा है। 4- मैने उसे पीटा। उपर्युक्त चारों वाक्यों में क्रमशः – जयद्रथ को मारा, भौंक रहा है, डाल पर बैठा है, उसे पीटा विधेय है .
नोट → काई बार वाक्य में प्रकट रूप में उद्देश्य दिखाई नहीं देता। आज्ञा सूचक वाक्य देखिए –
उद्देश्य विधेय
(तुम ) वहा मत जाओ
(आप) खाना खाइए
नोट – इसी प्रकार कई वाक्यों में प्रकट रूप में विधेय भी दिखाई नहीं देता ; जैसे – कोई पूछता है दिल्ली कौन गया है।
उत्तर मिलता है-‘मोहन’——
उत्तर वाक्य में पूरा वाक्य बनता है। मोहन दिल्ली गया है। किन्तु यहां ‘दिल्ली गया है। विधेय का लोप है। विधेय का यह अंग अप्रकट रूप में वाक्य में निहित है ।
→ उद्देश्य और विधेय एक-एक पद के भी हो सकते है और एक से अधिक पदों के भी।
उद्देश्य विधेय
मोहन जाता है |
मेरा भाई मोहन। स्कूल जाता है।
मेरा छोटा भाई मोहन प्रतिदिन दोपहर को स्कूल जाता है।
मेरा पौत्र श्रेय। अपनी पुस्तक मन लगाकर पढ़ता है।
इस प्रकार वाक्य छोटा या बड़ा, उसके दो ही अंग होते है- एक उद्देश्य और दूसरा विधेय
वाक्य के प्रकार- वाक्य के प्रकार को दो आधार पर विभाजित किया गया है; जो निम्न हैं –
1- रचना के आधार पर
2- अर्थ के अनुसार
1- रचना के आधार पर – रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं। (1) सरल वाक्य (2) संयुक्त वाक्य
(3) मिश्र- वाक्य ।
1 – सरल वाक्य – सरल वाक्य में कर्ता, कर्म, पूरक, क्रिया और क्रिया विशेषण घटकों अथवा इनमें से कुछ घटकों का योग होता है। स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होने वाला उपवाक्य ही सरल वाक्य है। सरल वाक्य में क्रिया यह निश्चित करती है कि वाक्य में कितने घटक होंगे हैं। अकर्मक क्रिया वाले वाक्य में केवल कर्ता होता है। सकर्मक क्रिया वाले वाक्य में कर्ता और कर्म दोनों होते हैं। इसमें एक ही समापिक क्रिया होती है ; जैसे –
(क) मोहन हँसता है।
(ज) राजेश बीमार है।
(ग) पुलिस ने चोर को पीटा।
(घ) माता जी ने सीला को एक साड़ी दी।
(ङ) शीला आपको अपना बड़ा भाई मानती है|
2- संयुक्त वाक्य – जिस वाक्य में साधारण अथवा मिश्र वाक्यों का मेल संयोजक अवयवों द्वारा होता है, उसे संयुक्त वाक्य कहते है। संयुक्त वाक्य में दो या दो से अधिक मुख्य अथवा स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं ; मुख्य उपवाक्य अपने पूर्ण अर्थ की अभिव्यक्ति के लिए किसी दूसरे उपवाक्य पर आश्रित नहीं रहते। उपवाक्य होते हुए भी उनमें पूर्ण अर्थ का बोध होता है। इसके बीच समानाधिकरण संबंध होता है और इसके उपवाक्य तथा, फिर , और , या , अथवा, अन्यथा, किन्तु, लेकिन, इसलिए, पर आदि समुच्यबोधक से जुड़ जाता है।
3- मिश्र वाक्य – मिश्र वाक्य में एक मुख्य या स्वतंत्र उपवाक्य और एक या एक से अधिक गौड़ या आश्रित उपवाक्य होते हैं। गौड़ उपवाक्य अपने पूर्ण अर्थ की अभिव्यक्ति के लिए मुख्य उपवाक्य पर आश्रित रहता है। मिश्र उपवाक्य ‘की,’ जैसा-वैसा, ‘जो-वह’, ‘जब-तब ‘, ‘क्योंकि’, ‘यदि- तो ‘ आदि व्यधिकरण योजकों से जुड़े होते है-
(क) अध्यापक ने बताया कि कल स्कूल में छुट्टी होगी।
(ख) जो लड़का कमरे में बैठा है , वह मेरा भाई है।
(ग) जब मैं छोटा था तब साइकिल खूब चलाता था
(घ) यदि इसबार वर्षा न हुई तो सारी फसल नष्ट हो जाएगी।
2. अर्थ के आधार पर वर्गीकरण- जब हम भाषा का प्रयोग करते है, तब हमारा कोई न कोई आशय, अर्थ या प्रयोजन अवश्य होता है। कभी हम कोई जानकारी देना चाहते हैं, कभी हम सुनने वाले से कोई कार्य सिद्ध करवाना चाहते हैं, कभी प्रार्थना या अनुरोध करना चाहते हैं। प्रयोजन अथवा अर्थ की दृष्टि से वाक्य आठ प्रकार के होते हैं।-
(क) विधान वाचक (Assertive Sentence)→ जिन वाक्यों से क्रिया के करने या होने की सूचना मिले, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते हैं ; जैसे- मैंने दूध पीया । वर्षा हो रही है। राम पढ़ रहा है।
“जिससे किसी बात के होने का बोध हो।” V.N
“इस प्रकार के वाक्यों द्वारा वक्ता श्रोता को कुछ जानकारी देना चाहता है|”NCERT
(ख) निषेधवाचक (Negative Sentence)- इसमें किसी बात या कार्य के ‘न होने ‘ या ‘न करने’ का भाव प्रकट होता है।
विस्मयवाचक को छोड़कर किसी भी प्रकार के वाक्य का निषेधवाचक वाक्य हो सकता है ; जैसे-
- सोहन इस समय फुटबाल नहीं खेल रहा है।
- अब तुम मत बोलो।
(ग) इच्छा वाचक वाक्य – कभी-कभी वक्ता श्रोता से कोई प्रत्यक्ष अपेक्षा नहीं करता। वह अपनी इच्छा मात्र प्रकट करता है, जिसका श्रोता से प्रायः संबंध रहता है। इसके मूल में दूसरे के प्रति प्रायः शुभकामना होती है; जैसे-
1- ईश्वर तुम्हें सुखी रखे।
2- आपकी मात्रा मंगलमय हो ।
(घ) संदेह वाचक वाक्य – जिन वाक्यों से संदेह या संभावना व्यक्त होती है उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते हैं ; जैसे –
- शायद शाम को वर्षा हो जाए।
- उसने खा लिया होगा।
- हो सकता है मोहन आ जाए।
(ड.) संकेत वाचक वाक्य –जिन वाक्यों से शर्त्त (संकेत) का बोध होता है यानी एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है, उन्हें संकेतवाचक वाक्य कहते हैं ; जैसे- यदि परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल होंगे।
अगर पानी नहीं बरसा तो मैं ठीक समय पर आ जाऊँगा।
(च) विधि वाचक (आज्ञा वाचक,आज्ञार्थक) वाक्य – ऐसे वाक्यों का प्रयोजन वक्ता-श्रोता के पारस्परिक सामाजिक
संबंध के आधार पर आदेश, निर्देश, आज्ञा, अनुरोध, प्रार्थना अथवा निवेदन हो सकता है।
- घर से बाहर जाओ।
- आप चाप पीजिए।
- बड़ो का सम्मान करो ।
(छ) प्रश्न वाचक वाक्य – जिन वाक्यों से किसी प्रकार का प्रश्न पूछने का ज्ञान होता है, उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे –
- सीता तुम कहाँ से आ रही हो ?
- तुम क्या पढ़ रहे हो ?
(ज) विस्मय वाचक वाक्य –जिन वाक्यों से आश्चर्य, घृणा, क्रोध, शोक आदि भावों की अभिव्यक्ति होती है। उन्हें विस्मय वाचक कहते हैं जैसे- वाह ! कितना सुन्दर दृश्य है।
हाय ! उसके माता-पिता दोनों ही चल बसे।
शाबाश ! तुमने बहुत अच्छा काम किया।
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